अजादी की उमंग पर
चली जैसे इक तूफानी आँधी,
शीश झुकाए नमन करे हम
आपको, ए महात्मा गांधी।
जय जवान और जय किसान के नारे
बजे जैसे सुर और ताल,
सलाम-ए-हिन्द तुझको
हम करें ए बहादुर लाल।
अजादी के लिए कुर्बान हुए
ये सपूत हाल-बेहाल,
याद करेगा ये हिंदुस्तान क़ुर्बानी तुम्हारी
दिन, महीने, और साल।
न रुकेगी ये लहर
चाहे कितने भी करें हम तारों को गिन,
नत-मस्तक है हम सभी
आपके आज और भविष्य के जान-दिन!
Monday, September 5, 2022
On the eve of October 2nd~
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