Monday, September 5, 2022

And this is for our nation..


और कितनी जाने जानी है,
और कितनी गोलियां सीने पर खानी है,
आजादी तो कब की मिल चुकी,
उसकी कीमत पर क्यों आज भी हमें चुकानी है?

बह रहा है खून भी कुछ इस तरह,
मानो जैसे की पानी है,
खुदा नहीं पर क्या तुम तय करोगे
की ज़िन्दगी किनकी आनी-जानी है?

जान और ज़मीन में ऐसा भी क्या मज़ा,
जहाँ न कोई राजा है और रानी है,
क्यों लूट रहे हो ज़िन्दगी को इस कदर,
जहां पलते प्यारे ख्वाब और सच्ची कहानी है|

अपने जहेन को टटोलो,
इन्साफ और ईमान तुम्हे ही कमानी है,
नेख बंदा वोह है खुदा का,
जिसे मोहब्बत पाना और नफरत गवानी है|

लाख जुबानें हो मगर,
दिल और जान एक बनानी है,
सरहदें चाहे जितनी भी हो मगर,
दिल से गुस्से की दरार मिटानी है|

हैवानियत को छोड़ इंसान बने,
हमें यही बात दिल से मनवानी है,
सरफरोशी की वोही आग,
अपने अन्दर आज हमें सुल्गानी है|

सच्चे दिल से आजमाकर दिल में,
बदला नहीं सही बदलाव लानी है,
सच्ची राह पर चलने की चाह से
एक जोरदार सैलाब लानी है|

इतिहास हमें फिर से दौरानी है,
जो लुट गया वोह फिर से कमानी है,
बहते हुए लहू में,
वह जज्बात और रवानी लानी है|

कत्लेआम से जिंदादिली नहीं बनानी है,
पर सादगी और मोहब्बत से,
ज़िन्दगी बेहतर से बेहतरीन बनानी है|

जय हिन्द!

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